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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 44
स्थूलस्वरूपसूक्ष्मान्वयार्थवत्त्वसंयमाद्भूतजयः ॥ स्थूल-स्वरुप-सूक्ष्म-अन्वय-अर्थवत्त्व-‌संयमाद्-भूतजय:॥
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व आकाश ये पांच महाभूत होते हैं । पञ्च महाभूतों की स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अन्वय और अर्थवत्त्व रूप से पांच विभाग हैं । इन सभी विभागों में एक साथ या क्रम से संयम करने पर योगी सभी पञ्च महाभूतों पर विजय प्राप्त कर लेता है ।
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