शरीर के साथ सम्पर्क होते हुए भी मन का शरीर से बाहर के पदार्थों के साथ व्यापार होता है । वह महाविदेहा नामक धारणा कहलाती है । इस धारणा से ज्ञान के प्रकाश पर पड़ने वाले आवरण का नाश हो जाता है ।
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