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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 39
उदानजयाज्जलपङ्ककण्टकादिष्वसङ्ग उत्क्रान्तिश्च ॥ उदान-जयात्-जल-पंक-कण्टक-आदिषु-असंग, उत्क्रान्ति: च ॥
उदान नामक प्राण पर विजय प्राप्त करने के बाद योगी जल, कीचड़ व काँटो के प्रभाव से रहित हो जाता है ।
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