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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 31
कूर्मनाड्यां स्थैर्यम् ॥ कूर्म,नाड्याम् ,स्थैर्यम् ॥
कूर्म (गले से नीचे उदर स्थल में कछुए की आकार की नाड़ी होती है) नामक नाड़ी में संयम करने से योगी को स्थिरता की प्राप्ति होती है ।
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