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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 24
बलेषु हस्तिबलादीनि ॥ बलेषु, हस्ति-बलादीनि‌ ‌॥
अलग- अलग प्रकार के बलों में संयम करने से योगी को हाथी, गरुड़, वायु आदि के समान अलग- अलग प्रकार के बलों की प्राप्ति हो जाती है ।
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