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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 23
मैत्र्यादिषु बलानि ॥ मैत्री, आदिषु , बलानि ॥
मैत्री, करुणा, मुदिता इन तीन चित्त की प्रसन्नता करने वाले उपायों में संयम (धारणा-ध्यान और समाधि का अभ्यास करने से) इन तीनों भावों में अतिशय बल की प्राप्ति होती है ।
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