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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 22
सोपक्रमं निरुपक्रमं च कर्म तत्संयमादपरान्तज्ञानमरिष्टेभ्यो वा ॥ सोपक्रमम् , निरूपक्रमम् , च, कर्म, तत्,संयमात्,अपरान्त-ज्ञान-अरिष्टेभ्यो, वा ॥
शीघ्र या विलम्ब से फल देने वाले कर्मशयों में संयम करने से मृत्यु या मृत्यु का ज्ञान कराने वाले संकेतों का योगी को पूर्व ज्ञान हो जाता है ।
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