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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 19
‌प्रत्ययस्य परचित्तज्ञानम् ॥ प्रत्ययस्य, पर, चित्त-ज्ञानम् ॥
योगी जब अपने से भिन्न व्यक्ति के चित्त में संयम करता है तो उसे दुसरे व्यक्ति के चित्त के भावों का ज्ञान हो जाता है।
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