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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 17
शब्दार्थप्रत्ययानामितरेतराध्यासात् सङ्करस्तत्प्रविभागसंयमात्सर्वभूतरुतज्ञानम् ॥ शब्द-अर्थ-प्रत्ययानाम्, इतरेतर, अध्यासात्‌, सङ्कर:, तत्, प्रविभाग-संयमात्, सर्व, भूत, रुत, ज्ञानम् ॥
शब्द एवं उसके अर्थ एवं ज्ञान का परस्पर जुड़ाव होने से वे एक दुसरे के साथ मिले हुए जैसे प्रतीत होते हैं तब उनके विभाग (अलग-अलग) में संयम (धारणा-ध्यान-समाधि) करने से सभी प्राणियों के शब्दों का ज्ञान हो जाता है ।
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