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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 13
एतेन भूतेन्द्रियेषु धर्मलक्षणावस्थापरिणामा व्याख्याताः ॥ एतेन, भूत-इन्द्रियेषु , धर्म-लक्षण-अवस्था-परिणामा, व्याख्याताः ॥
जिस प्रकार पूर्व के सूत्रों में चित्त के जो निरोध, समाधि व एकाग्रता परिणाम महर्षि द्वारा कहे गए हैं, उसी प्रकार सभी पंच महाभूतों व इन्द्रियों में होने वाले धर्म परिणाम, लक्षण परिणाम व अवस्था परिणाम भी समझे जाने चाहिए।
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