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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 12
ततः पुनः शान्तोदितौ तुल्यप्रत्ययौ चित्तस्यैकाग्रतापरिणामः ॥ ततः , पुनः , शान्त , उदित , तुल्य , प्रत्यय: , चितस्य , एकाग्रता , परिणाम: ॥
चित्त के समाधि परिणाम के बाद एक वस्तु या ध्येय विषयक पूर्व ज्ञान शांत होकर पुनः उसी समान ज्ञान का उदय होना चित्त का एकाग्रता परिणाम होता है। इसमें ध्येय का ज्ञान बीच में खंडित होने पर भी अखंडित महसूस होता है।
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