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योगसूत्र • अध्याय 3 • श्लोक 10
तस्य प्रशान्तवाहिता संस्कारात् ॥ तस्य , प्रशांत‌ , वाहिता , संस्कारात् ‌॥
निरोध संस्कारों के प्रभाव से योगी के चित्त की स्थिति पूर्णतः शान्त हो जाती है। अर्थात उस अवस्था में योगी का चित्त शान्त एवं सहज गति के साथ प्रवाहमान रहता है।
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