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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 54
स्वविषयासंप्रयोगे चित्तस्वरूपानुकार इवेन्द्रियाणां प्रत्याहारः ॥ स्वविषय-असम्प्रयोगे, चित्तस्य-स्वरूपानुकार-इव-इन्द्रियाणाम् .प्रत्याहार:॥
जब सभी इन्द्रियों का अपने –अपने कार्यों के साथ सम्बन्ध न होने से वे इन्द्रियां चित्त के वास्तविक स्वरूप के जैसे हो जाती हैं । इन्तोद्रियों की ऐसी स्थिति को प्रत्याहार कहते हैं ।
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