जब सभी इन्द्रियों का अपने –अपने कार्यों के साथ सम्बन्ध न होने से वे इन्द्रियां चित्त के वास्तविक स्वरूप के जैसे हो जाती हैं ।
इन्तोद्रियों की ऐसी स्थिति को प्रत्याहार कहते हैं ।
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