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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 50
बाह्याभ्यन्तरस्तम्भवृत्तिर्देशकालसंख्याभिः परिदृष्टो दीर्घसूक्ष्मः ॥ बाह्य-आभ्यंतर-स्तम्भवृत्ति:-देश -काल-संख्याभि:परिदृष्ट: दीर्घ-सूक्ष्म:॥
बाह्यवृत्ति, आभ्यन्तरवृत्ति व स्तम्भवृत्ति ये तीन प्राणायाम स्थान, समय व गणना के द्वारा ठीक प्रकार से देखा व जाना से प्राण लम्बा व हल्का हो जाता है ।
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