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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 49
तस्मिन्सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेदः प्राणायामः ॥ तस्मिन् सति, श्वास,प्रश्वासयो: गतिविच्छेद: प्राणायाम:॥
आसन की सिद्धि हो जाने पर प्राणवायु को अन्दर लेने (पूरक) व प्राणवायु को बाहर छोड़ने की (रेचक) की सहज गति को अपने सामर्थ्य अनुरूप रोक देना या स्थिर कर देना ही प्राणायाम कहलाता है ।
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