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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 47
प्रयत्नशैथिल्यानन्तसमापत्तिभ्याम् ॥ प्रयत्न-शैथिल्य-अनन्त-समापत्तिभ्याम् ॥
आसन करते समय शारीरिक गतिविधियों या चेष्टाओं को सहज प्रयत्न द्वारा शिथिल या रोक देने से और अनन्त (आकाश या परमात्मा) में सहज ध्यान लगाने से साधक के आसन की सिद्धि हो जाती है ।
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