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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 45
समाधिसिद्धिरीश्वरप्रणिधानात् ॥ समाधिसिद्धि:, ईश्वर- प्रणिधानात् ॥
ईश्वर की भक्ति विशेष करने एवं फल की इच्छा किये बिना शुभ अशुभ सब प्रकार के कर्मों को ईश्वर में समर्पित करने से शीघ्र ही समाधि की प्राप्ति हो जाती है ।।
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