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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 44
स्वाध्यायाद् इष्टदेवतासंप्रयोगः ॥ स्वाध्यायात् -इष्टदेवता-सम्प्रयोग:॥
सद्ग्रन्थों एवं गुरुमुख से सुने ज्ञान का अध्ययन करने से विद्वान, ऋषि-मुनि एवं योग एवं स्वाध्यायनिष्ठ योगियों से उनका साक्षात् दर्शन एवं उनकी अनुकम्पा प्राप्त हो जाती है।
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