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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 39
अपरिग्रहस्थैर्ये जन्मकथंतासंबोधः॥
अपरिग्रह के दृढ़ प्रतिष्ठित हो जाने पर; पूर्वजन्म कैसे हुए थे? इस बात का भलीभाँति ज्ञान हो जाता है।
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