सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम्॥
सत्य , प्रतिष्ठायाम् , क्रिया , फल , आश्रयत्वम्॥
सत्य में दृढ़ स्थिति हो जाने पर उस योगी की क्रिया अर्थात् कर्म फल के आश्रय का भाव आ जाता है।
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