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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 35
अहिंसाप्रतिष्ठायां तत्सन्निधौ वैरत्यागः॥ अहिंसा , प्रतिष्ठायाम् , तत् , सन्निधौ , वैर , त्यागः॥
अहिंसा की दृढ़ स्थिति हो जाने पर उस योगी के निकट सब प्राणी वैरभाव त्याग कर देते हैं ।
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