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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 33
वितर्कबाधने प्रतिपक्षभावनम्॥ वितर्क , बाधने , प्रतिपक्ष , भावनम् ॥
वितर्क यम और नियमों के हिंसादि के भाव यम-नियम के पालन में बाधा पहुँचावें तब उनके प्रतिपक्षी विचारों का बारंबार चिन्तन करना चाहिए ।
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