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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 31
जातिदेशकालसमयानवच्छिन्नाः सार्वभौमा महाव्रतम्॥ जाति , देश , काल , समय , अनवच्छिन्नाः , सार्वभौमा: , महाव्रतम् ॥
उक्त यम जाति, देश, काल और विशेष नियम की सीमा से रहित और सब अवस्थाओं में पालन करने योग्य महाव्रत कहलाते हैं ।
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