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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 28
योगाङ्गाऽनुष्ठानादशुद्धिक्षये ज्ञानदीप्तिराविवेकख्यातेः॥ योग , अङ्ग , अनुष्ठानात् , अशुद्धि: , क्षये , ज्ञान , दीप्ति: , आविवेकख्यातेः ॥
योग के विभिन्न अंगों का अनुष्ठान से अपवित्रता के नाश होने पर ज्ञान का प्रकाश विवेकख्यातिपर्यन्त हो जाता है ।
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