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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 26
विवेकख्यातिरविप्लवा हानोपायः॥ विवेकख्याति: , अविप्लवा , हान , उपायः ॥
उस अविद्या के अभाव से संयोग का अभाव हो जाता है, यही हान अज्ञान का परित्याग है और वही द्रष्टा चेतन आत्मा का 'कैवल्य' अर्थात् मोक्ष है ।
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