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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 23
स्वस्वामिशक्त्योः स्वरूपोपलब्धिहेतुः संयोगः॥ स्व , स्वामि , शक्त्योः , स्वरूप , उपलब्धि , हेतुः , संयोगः ॥
दृश्य (प्रकृति) और स्वामी (द्रष्टा पुरुष) इन दोनों शक्तियों के स्वरूप की प्राप्ति का कारण संयोग है ।
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