द्रष्टा जो चेतनमात्र ज्ञानस्वरूप आत्मा है । यद्यपि वह शुद्ध अर्थात् निर्विकार होता हुआ भी बुद्धिवृत्ति के अनुरूप देखनेवाला है ।
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