प्रकाश, क्रिया और स्थिति जिसका स्वभाव है, भूत और इन्द्रियाँ जिसका स्वरूप हैं, पुरुष के लिए भोग और मुक्ति ही जिसका प्रयोजन है— वह दृश्य है।
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