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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 18
प्रकाशक्रियास्थितिशीलं भूतेन्द्रियात्मकं भोगापवर्गार्थं दृश्यम्॥ प्रकाश , क्रिया , स्थिति , शीलम् , भूतेन्द्रिय , आत्मकम् , भोग , अपवर्ग , अर्थम् , दृश्यम् ॥
प्रकाश क्रिया और स्थिति जिसका स्वभाव है, भूत और इन्द्रियाँ जिसका स्वरूप हैं, पुरुष के लिए भोग और मुक्ति ही जिसका प्रयोजन है, वह दृश्य है ।
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