परिणामतापसंस्कारदुःखैर्गुणवृत्तिविरोधाच्च दुःखमेव सर्वं विवेकिनः॥
परिणाम , ताप , संस्कार , दुःखै , गुण , वृत्ति , विरोधात् , च , दुःखम् , एव , सर्वम् , विवेकिनः ॥
परिणाम दु:ख, ताप दु:ख और संस्कार दु:ख, इन तीन प्रकार के दु:खों के कारण और तीनों गुणों की वृत्तियों में परस्पर विरोधी स्वभाव के कारण विवेकी के लिए सब-के-सब कर्मफल दु:खरूप ही हैं ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगसूत्र के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
योगसूत्र के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।