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योगसूत्र • अध्याय 2 • श्लोक 12
क्लेशमूलः कर्माशयो दृष्टादृष्टजन्मवेदनीयः॥ क्लेश , मूलः , कर्म , आशय: , दृष्ट , अदृष्ट , जन्म , वेदनीयः ॥
क्लेश जिसकी मूल है, ऐसे कर्मसंस्कारों का समुदाय वर्तमान और भविष्य में होनेवाले जन्मों में भोगा जानेवाला है।
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