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योगसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 38
स्वप्ननिद्राज्ञानालम्बनं वा॥ स्वप्न , निद्रा , ज्ञान , आलम्बनम् , वा॥
स्वप्न और निद्रा के ज्ञान का अवलम्बन करनेवाला चित्त भी स्थिर हो सकता है ।
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