प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां वा प्राणस्य॥
प्रच्छर्दन , विधारणाभ्याम् , वा , प्राणस्य ॥
प्राणवायुको बारम्बार बाहर निकालने और रोकने से भी चित्त स्थिर होता है ।
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