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योगसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 30
व्याधिस्त्यानसंशयप्रमादालस्याविरतिभ्रान्तिदर्शनालब्धभूमिकत्वानवस्थितत्वानि चित्तविक्षेपास्तेऽन्तरायाः॥ व्याधि , स्त्यान , संशय , प्रमाद , आलस्य , अविरति , भ्रान्ति-दर्शन , अलब्ध-भूमिकत्व , अनवस्थितत्वानि , चित्त , विक्षेपा: , ते , अन्तरायाः ॥
व्याधि (रोग), मानसिक जड़ता, संदेह, प्रमाद, आलस्य, विषयतृष्णा, मिथ्या अनुभव, समाधि नहीं लग पाना , समाधि लाभ होने पर भी अधिक देर समाधि में नहीं ठहर पाना - ये चित्त के नौ क्षोभ या योग के मूल विघ्न हैं ।
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