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योगसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 29
ततः प्रत्यक्चेतनाधिगमोऽप्यन्तरायाभावश्च॥ ततः , प्रत्यक्-चेतना , अधिगम: , अपि , अन्तराय , अभाव: , च ॥
उस ईश्वर प्रणिधान से विध्नों का अभाव और अन्तरात्मा के स्वरूप की प्राप्ति अर्थात् साक्षात्कार भी हो जाता है।
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