तज्जपस्तदर्थभावनम्॥
तत् , जप: , तत् , अर्थ , भावनम्॥
उस ॐ कार का जप और उस ईश्वर के अर्थस्वरूप का ध्यान करना अर्थात् पुनः पुन: चिन्तन करना चाहिए ।
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