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योगसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 26
पूर्वेषाम् अपि गुरुः कालेनानवच्छेदात्॥ पूर्वेषाम् , अपि , गुरुः , कालेन , अनवच्छेदात्॥
वह ईश्वर पूर्व उत्पन्न गुरुगणों का भी गुरु है, क्योंकि वह काल से सीमित नहीं है अर्थात् सर्वकाल में विद्यमान है ।
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