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योगसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 24
क्लेशकर्मविपाकाशयैरपरामृष्ट: पुरुषविशेष ईश्वरः ॥ क्लेश , कर्म , विपाक , आशयै: , अपरामृष्ट: , पुरुष-विशेष: , ईश्वरः ॥
क्लेश, कर्म, विपाक, आशय - इन चारों के संबंध से रहित है तथा जो समस्त पुरुषों से उत्तम है, वह ईश्वर है ।
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