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योगसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 16
तत्परं पुरुषख्यातेर्गुणवैतृष्ण्यम् ॥ तत् , परम् , पुरुष , ख्याते: , गुण , वैतृष्ण्यम् ॥
पुरुष के असल स्वरूप के ज्ञान से जो प्रकृति के गुणों में तृष्णा रहित हो जाना है - वह पर-वैराग्य है।
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