तत्परं पुरुषख्यातेर्गुणवैतृष्ण्यम् ॥
तत् , परम् , पुरुष , ख्याते: , गुण , वैतृष्ण्यम् ॥
पुरुष के असल स्वरूप के ज्ञान से जो प्रकृति के गुणों में तृष्णा रहित हो जाना है - वह पर-वैराग्य है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
योगसूत्र के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
योगसूत्र के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।