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यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 7
सोऽहमिच्छामि तच्छ्रोतुं यमस्य वशवर्तिनः । न भवन्ति नरा येन तत्कर्म कथयामलम् ॥
अतः आप मुझे वह कर्म बताइये, जिसे करने से मनुष्य यमराज के वशीभूत नहीं होता; मैं आपसे यही सुनना चाहता हूँ।
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