मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 6
यातनाभ्यः परिभ्रष्टा देवाद्यास्वथ योनिषु । जन्तवः परिवर्तन्ते शास्त्राणामेष निर्णयः ॥
तदनन्तर पाप-भोग के समाप्त होने पर वे देवादि योनियों में घूमते रहते हैं - सकल शास्त्रों का ऐसा ही मत है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
यमगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

यमगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें