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यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 38
किंकरा दण्डपाशौ वा न यमो न च यातनाः । समर्थास्तस्य यस्यात्मा केशवालम्बनः सदा ॥
जिसका हृदय निरन्तर भगवत्परायण रहता है उसका यम, यमदूत, यमपाश, यमदण्ड अथवा यम-यातना कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते।
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