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यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 37
मयाप्येतद्यथान्यायं सम्यग्वत्स तवोदितम् । यथा विष्णुमृते नान्यत्त्राणं संसारसागरे ॥
हे वत्स! वही सम्पूर्ण वृत्तान्त, जिस प्रकार कि इस संसार-सागर में एक विष्णुभगवान्‌ को छोड़कर जीव का और कोई भी रक्षक नहीं है, मैंने ज्यों-का-त्यों तुम्हें सुना दिया।
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