'हे कमलनयन! हे वासुदेव! हे विष्णो! हे धरणिधर! हे अच्युत! है शंख-चक्रपाणे! आप हमें शरण दीजिये' - जो लोग इस प्रकार पुकारते हों, उन निष्पाप व्यक्तियों कों तुम दूर से ही त्याग देना।
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