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यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 32
सकलमिदमहं च वासुदेवः परमपुमान्परमेश्वरः स एकः । इति मतिरमला भवत्यनन्ते हृदयगते व्रज तान्विहाय दूरात् ॥
यह सकल प्रपंच और मैं एक परमपुरुष परमेश्वर वासुदेव ही हैं, हृदय में भगवान्‌ अनन्त के स्थित होने से जिनकी ऐसी स्थिर बुद्धि हो गयी हो, उन्हें तुम दूर ही से छोड़कर चले जाना।
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