जो दुष्टबुद्धि अपने परम सुहृद्, बन्धु-बान्धव, स्त्री, पुत्र, कन्या, माता, पिता तथा भृत्यवर्ग के प्रति अर्थतृष्णा प्रकट करता है, उस पापाचारी को भगवान् का भक्त मत समझो।
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