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यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 28
हरति परधनं निहन्ति जन्तून् वदति तथानिशनिष्ठुराणि यश्च । अशुभजनितदुर्मदस्य पुंसः कलुषमतेर्हृदि तस्य नास्त्यनन्तः ॥
जो पुरुष दूसरों का धन हरण करता है, जीवों की हिंसा करता है तथा मिथ्या और कटुभाषण करता है, उस अशुभ कर्मोन्मत्त दुष्टबुद्धि के हृदय में भगवान्‌ अनन्त नहीं टिक सकते।
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