हृदि यदि भगवाननादिरास्ते
हरिरसिशंखगदाधरोऽव्ययात्मा ।
तदघमघविघातकर्तृभिन्नम्
भवति कथं सति वान्धकारमर्के ॥
यदि खड़्ग, शंख और गदाधारी अव्ययात्मा भगवान् हरि हृदय में विराजमान हैं तो उन पापनाशक भगवान् के द्वारा उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। सूर्य के रहते हुए भला अन्धकार कैसे ठहर सकता है।
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