उन सनातन भगवान् के हृदय में विराजमान होने पर पुरुष इस जगत् के लिये शान्तस्वरूप हो जाता है, जिस प्रकार नवीन शालवृक्ष अपने सौन्दर्य से ही भीतर भरे हुए अति सुन्दर पार्थिव रस को बतला देता है।
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