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यमगीता • अध्याय 1 • श्लोक 24
विमलमतिविमत्सरः प्रशान्तः शुचिचरितोऽखिलसत्त्वमित्रभूतः । प्रियहितवचनोऽस्तमानमायो वसति सदा हृदि तस्य वासुदेवः ॥
जो व्यक्ति निर्मल-चित्त, मात्सर्यरहित, प्रशान्त, शुद्ध-चरित्र, समस्त जीवों का सुहृद, प्रिय और हितवादी तथा अभिमान एवं माया से रहित होता है, उसके हृदय में भगवान्‌ वासुदेव सर्वदा विराजमान रहते हैं।
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