जो एकान्त में पड़े हुए दूसरे के सोने को देखकर भी उसे अपनी बुद्धि द्वारा तृण के समान समझता है और निरन्तर भगवान् का अनन्यभाव से चिन्तन करता है, उस नरश्रेष्ठ को विष्णु का भक्त जानो।
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